राहुल गांधी ने CBSE धांधली पर फायर किया, कहा: Gen-Z तोड़ेगी मोदी का अहंकार

25 मई 2026 को राहुल गांधी, नेता प्रतिपक्ष और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक ऐसा बयान दिया जिसने राजनीतिक हवाओं में तूफान भर दिया। उन्होंने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की कक्षा 12वीं के परिणामों और 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' (OSM) प्रणाली में alleged अनियमितताओं को घेरते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर सीधा हमला बोला। राहुल गांधी ने दावा किया कि "PM मोदी-प्रधान की जोड़ी ने एक और संस्था को धांधली का प्रतीक बना दिया है"।

यह बयान NEET पेपर लीक मामले के बाद आया है, जब सरकारी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर पहले से ही सवाल उठ रहे थे। लेकिन इस बार, विरोध का केंद्र बोर्ड परीक्षाएं हैं—वे परीक्षाएं जो लाखों छात्रों के भविष्य का निर्धारण करती हैं। राहुल गांधी ने लिखा, "दशकों में पहली बार CBSE बोर्ड परीक्षा पर इतने गंभीर सवाल उठे हैं।"

OSM प्रणाली पर सवाल और 'धांधली' के आरोप

राहुल गांधी के आरोपों का मुख्य बिंदु CBSE द्वारा अपनाई गई ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली थी। उनके अनुसार, इस डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया में भारी गड़बड़ी हुई है, जिससे छात्रों के अंक और परिणाम संदिग्ध दिख रहे हैं। हालांकि खबरों में किसी विशिष्ट छात्र का नाम या सटीक संख्या नहीं दी गई, लेकिन सामाजिक माहौल तनावग्रस्त था।

मीडिया रिपोर्ट्स और टीवी चर्चाओं में इसे "CBSE Marking scam" और "CBSE रिजल्ट धांधली" के रूप में प्रस्तुत किया गया। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि सरकार ने CBSE जैसे प्रतिष्ठित संगठन को धोखेबाजी का प्रतीक बना दिया है। उनकी बात का तात्पर्य स्पष्ट था: यदि देश की सबसे बड़ी शिक्षा बोर्ड परीक्षा में भरोसा नहीं रह गया, तो युवाओं का भविष्य क्या होगा?

Gen-Z को चुनौती और 17 वर्षीय छात्र का उदाहरण

राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में विशेष रूप से जेनरेशन-जेड (Gen-Z) और युवाओं का जिक्र किया। उन्होंने लिखा, "सच यह है - मोदी सरकार युवाओं और Gen Z से डरती है, क्योंकि वो अब सवाल पूछ रहे हैं। और जो सवाल पूछे, उसे यह सरकार बदनाम करती है, डराती है, कुचलती है।"

उन्होंने एक 17 वर्षीय छात्र का उदाहरण देकर अपनी बात को और मजबूत किया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि जब यह युवा अपने भविष्य के लिए आवाज उठाता है, तो भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके समर्थक उसे 'देशद्रोही' बनाने की कोशिश करते हैं। यह रиторिक सरकार की ओर से सवाल पूछने वाले युवाओं को दबाने की व्यवस्थित प्रवृत्ति को दर्शाता है, ऐसा उनका तर्क था।

अंत में, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधे संबोधित करते हुए लिखा, "पर सुन लीजिए, मोदी जी - यही युवा, यही Gen-Z आपका अहंकार तोड़ेगा।" यह वाक्य मीडिया में वायरल हो गया और कई चैनलों ने इसे अपनी हेडलाइन बनाया।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग

केवल बयानबाजी तक सीमित न रहते हुए, राहुल गांधी ने स्पष्ट मांगें रखीं। लाइव हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA), जो भारत में राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं का आयोजन करती है, में "व्यापक सुधार" की आवश्यकता पर जोर दिया।

उनकी मांग थी कि मोदी सरकार को सार्वजनिक परीक्षाओं के प्रश्नपत्र तैयार करने, टाइप करने, अनुवाद करने, छापने, पहुंचाने, परीक्षा संचालन और मूल्यांकन तक की पूरी प्रक्रिया के लिए एक "फुलप्रूफ प्रोटोकॉल" विकसित करना चाहिए। इसका उद्देश्य भविष्य में धांधली या लीक जैसे आरोपों की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ना है।

मीडिया प्रतिक्रिया और विशेषज्ञों की राय

मीडिया प्रतिक्रिया और विशेषज्ञों की राय

राहुल गांधी के इस बयान ने मीडिया में तेज चर्चा शुरू कर दी। आज तक और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने इस मुद्दे को प्रमुखता से कवर किया। एक यूट्यूब वीडियो में, जिसका शीर्षक "Rahul Gandhi says Gen-Z will shatter Modi govt's arrogance" था, एंकर ने प्रोफेसर S S P सिंह से प्रतिक्रिया ली।

प्रोफेसर S S P सिंह ने इस मौके पर कड़ा शब्द प्रयोग करते हुए कहा, "पहली चीज यह है कि ये अनपढ़ समाज बनाना चाहता है गद्दार नरेंद्र मोदी देश के अंदर।" इस कथन ने राजनीतिक बहस को और तीखा कर दिया। वहीं, DB Live जैसे चैनलों ने "Gen-Z तोड़ेगा Modi का अहंकार!" जैसे शीर्षकों के साथ वीडियो अपलोड किए, जिन्हें कुछ ही घंटों में हजारों व्यूज मिल गए।

एबीपी लाइव की उसी वेबपेज पर, जहां यह राजनीतिक खबर प्रकाशित थी, नई दिल्ली के लिए पेट्रोल की कीमत ₹ 94.77 प्रति लीटर और डीजल की कीमत ₹ 87.67 प्रति लीटर दिखाई गई। यह अतिरिक्त जानकारी वर्तमान आर्थिक संदर्भ को रेखांकित करती है, जहां महंगाई और शिक्षा दोनों ही युवाओं के लिए चुनौती बन रही हैं।

Frequently Asked Questions

CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली में क्या समस्या है?

राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं के अनुसार, OSM प्रणाली में मूल्यांकन के दौरान गड़बड़ी हुई है, जिससे छात्रों के अंक और परिणाम संदिग्ध हैं। हालांकि, अभी तक किसी आधिकारिक जांच रिपोर्ट में विशिष्ट तथ्यात्मक गलतियों की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन युवाओं में असंतोष व्याप्त है।

राहुल गांधी ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से क्या मांग की है?

राहुल गांधी ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से तुरंत इस्तीफे की मांग की है। इसके अलावा, उन्होंने NTA में व्यापक सुधार और परीक्षा प्रक्रिया के सभी चरणों के लिए एक 'फुलप्रूफ प्रोटोकॉल' लागू करने की भी मांग की है ताकि भविष्य में लीक या धांधली न हो।

Gen-Z और युवाओं का इस मामले में क्या किरदार है?

राहुल गांधी का मानना है कि Gen-Z अब सवाल पूछ रही है और सरकार इसे सहन नहीं कर पा रही है। उन्होंने एक 17 वर्षीय छात्र का उदाहरण दिया जिसे सवाल पूछने पर 'देशद्रोही' बताया गया, और चेतावनी दी कि यही युवा मोदी सरकार के अहंकार को तोड़ देंगे।

NEET पेपर लीक और CBSE मामले में क्या संबंध है?

NEET पेपर लीक मामले के बाद सरकारी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर पहले से ही सवाल उठे थे। CBSE के OSM मामले ने इस असंतोष को और बढ़ा दिया है, जिससे विपक्ष ने इसे सरकार की निष्फलता का प्रमाण प्रस्तुत किया है।